बीजेपी सरकार तोड़ेगी 3500 मस्जिदें, बुर्का व जालीदार टोपी पर लगाएगी बैन ? मुस्लिम नहीं रख पाएंगे दाढ़ी ?

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अगर 2024 में केंद्र में फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आती है, नरेंद्र मोदी फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो मुसलमानों की 3500 मस्जिदों को तोड़ दिया जाएगा, इसकी लिस्ट बना ली गई है. यही नहीं बल्कि मुस्लिम पुरुषों  दाढ़ी को जबरन काट जाएगा तथा मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर रोक लगा दी जाएगी. ये बात मैं नहीं बोल रहा हूं और ना ही बीजेपी या आरएसएस के किसी नेता ने कही है बल्कि ये बात ऑल इंडिया यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट AIUDF बदरुद्दीन अजमल ने कही है.

असम से लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल की, जिनके एक बयान पर न सिर्फ असम बल्कि देश की सियासत में भी भूचाल आ गया है. बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि यदि भारतीय जनता पार्टी की दोबारा केंद्र में सरकार बनी तो देशभर में यह 3500 मस्जिदों को ढहा देगी.

बदरुद्दीन अजमल ने असम के धुबरी जिले के गौरीपुर में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक रैली में बुधवार को अजमल ने राज्य की बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि यदि यह फिर जीत गई तो मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनकर बाहर नहीं निकल पाएंगी. अजमल ने बीजेपी पर अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाने का आरोप लगाते हुए अजमल ने कहा कि बीजेपी ने देशभर के 3500 मस्जिदों की लिस्ट बना रखी है. यदि यह पार्टी फिर केंद्र में सत्ता में आई तो इन सभी मस्जिदों को ढहा दिया जाएगा.

रैली में जुटी भीड़ से सवाल करते हुए अजमल ने कहा कि हम अपने घर के अंदर क्या खाते हैं क्या यह बीजेपी फैसला करेगी? यदि आप सतर्क नहीं रहे और बीजेपी असम में सत्ता में वापस आती है तो वे महिलाओं को बुर्का पहनकर बाहर नहीं निकलने देंगे, दाढ़ी नहीं रखने देंगे, टोपी नहीं पहनने देंगे और यहां तक कि मस्जिदों में अजान नहीं देने देंगे। क्या आप इस तरह जिंदगी जी पाएंगे? क्योंकि बीजेपी देश, महिलाएं, मस्जिदों, तलाक और दाढ़ी की दुश्मन है.

बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि क्या आप इस तरह एक पार्टी को वोट देंगे? अब आपको अधिक सावधान रहने की जरूरत है। अगर आप सावधान नहीं हैं, और अगर भाजपा असम में फिर से सरकार बनाती है तो आपको बुर्का पहनकर आने की इजाजत नहीं होगी, आप चेहरे पर दाढ़ी के साथ घर से बाहर नहीं निकल पाएँगे, आपको ये स्कलकैप अर्थात जालिदार टोपी पहनने की इजाजत नहीं होगी, आपको मस्जिदों में अज़ान जपने की इजाजत नहीं होगी। हम इस तरह एक जगह पर रह पाएँगे?”

साफ है कि बदरुद्दीन अजमल इस तरह की बयानबाजी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तथा मुस्लिम वोटों के लिए कर रहे हैं. अगर अजमल की बात सच होती तो मोदी के नेतृत्व में बीजेपी 6 साल से सत्ता में है, तो अभी तक एक भी मस्जिद क्यों नहीं गिराई गई? मुस्लिमों की दाढ़ी क्यों नहीं काटी गई? महिलाओं के बुर्का पहनने पर रोक क्यों नहीं लगाई गई? बड़ी बात ये है कि जो अजमल इस तरह की जहरीली भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, उनके साथ खुद को सेक्यूलरिज्म की ठेकेदार बताने वाली कांग्रेस ने गठबंधन किया है.

जी हाँ असम में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने AIUDF, नव गठित आंचलिक गन मोर्चा AGM और तीन लेफ्ट पार्टियों, CPI, CPI-M और CPI-ML से चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा की है. आप स्वयं देखिए कि जो कांग्रेस खुद को सेक्यूलर बताती है वह बीजेपी को रोकने के लिए बदरुद्दीन अजमल जैसे जहरीले व कट्टरवादी नेता के साथ गठबंधन भी कर रही है. बता दें कि बदरुद्दीन अजमल पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को शह देने के आरोप लगते रहे हैं. अब देखना ये है कि असम की जनता लेफ्ट, कांग्रेस व जहरीले अजमल को राज्य की सत्ता सौंपती है या फिर भगवाधारी बीजेपी पर अपना विश्वास बनाये रखती है.

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