आत्मनिर्भर भारत अभियान पर बोले केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान… नीली क्रांति करेगी युवाओं का भविष्य सुरक्षित

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वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से जब पूरी दुनिया कराह रही थी, उस समय हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि वह इस आपदा को अवसर में बदलें. इसी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान लांच किया. प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के अभियान को साकार करने के शासन तथा प्रशासन के साथ आम जनता भी पूरी मनोयोग से जुट गई है.
आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर केंद्र की मोदी सरकार में मत्स्य, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डा0 संजीव बालयान ने कहा है आत्मनिर्भर भारत अभियान देश की कायाकल्प कर देगा. केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालयान ने कहा है कि नीली क्रांति के तहत मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। इस क्षेत्र में नए युवाओं के लिए सीखने को बहुत कुछ है जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं.
डॉ. बालयान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लॉकडाउन के दौरान देश को आर्थिक मंदी से उबारने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए जो 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषण की है, उस घोषणा में प्रधानमंत्री ने मत्स्य सम्पदा योजना के तहत लोगों को मछली पालन से जुडने और इससे जुड़े व्यवसाय को देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि मछली पालन में बायोफ्लॉक पद्धति के तहत आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृत्रिम टैंक बनाकर उसमें मछली पालन किया जाता है.
इसके अतिरिक्त आरएएस और तालाब पद्धति से भी मछली पालन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत मछली पालन कर केन्द्र व प्रदेश सरकार मिलकर 40 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है. मत्स्य विभाग के रोहतक मण्डल के उपनिदेशक आत्माराम ने बताया कि बॉयोफ्लॉक पद्धति में मछली पालने के लिए पांच टैंक की क्षमता के लिए 7.50 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है जिसमें 6 लाख रूपये टैंक इत्यादि के खर्च के और 1.50 लाख रूपये अन्य खर्चो के लिए दिए जाते हैं। इसके अलावा पहले वर्ष की पट्टा धन राशि पर भी अनेक योजनाओं के तहत छूट दी जाती है
केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालयान ने कहा कि नीली क्रांति अर्थात मछली पालन करने वाला व्यक्ति एक साल में 2 बार मछलियां निकाल सकता है. वियतनाम, सिंघी और रूपचंदा मछलियां पालने के काम आती है और देश के कई भागों के अलावा अन्य देशों में भी निर्यात की जाती है. उन्होंने इस कार्य के लिए मछली पालन को अपनाकर यह काम करने वाले बिजेन्द्र सिंह की भी प्रशंसा की.

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