राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा थीं उमा भारती, कभी मंदिर के लिए मुंडवाया था सिर

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 लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की घड़ी करीब आती जा रही है। जिसके चलते भूमिपूजन की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में उन लोगों का इस ऐतिहासित घड़ी में हिस्सा बनना अनिवार्य हो जाता है, जिन्होंने राम मंदिर अंदोलन में बढ़चढ़ कर योगदान दिया। वहीं अब भूमिपूजन की अतिथियों की लिस्ट को भी अंतिम रूप दिया गया। जिसके चलते मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती को न्यौता भेजा गया।

 उमा भारती ने ट्वीट कर दी आमंत्रण की जानकारी
इसकी जानकारी देते हुए उमा भारती ने ट्वीट कर लिखा कि राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने निर्देश दिया है कि 4 अगस्त की शाम तक अयोध्या पहुंच जाऊं। 6 अगस्त तक मुझे अयोध्या में ही रहना होगा। उमा भारती ने साथ ही यह भी बताया है कि वो अभी 30 जून को ही अयोध्या गई थीं। जब 28 साल उम्र में विहिप के मार्गदर्शक मंडल की सदस्य बनी- उमा
वहीं राम मंदिर आंदोलन के बारे में उमा भारती ने बताया कि जब 28 साल की थीं, जून 1990 में तब विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के मार्गदर्शक मंडल की सदस्य बनी थीं। उन्होंने कहा है कि 31 अक्टूबर को मार्गदर्शक मंडल की बैठक में राम जन्मभूमि पर कारसेवा की घोषणा हुई और विहिप ने पूरे देश में कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया। लालकृष्ण आडवाणी ने भी रथ यात्रा की घोषणा कर दी, फिर पूरे देश में जैसे राम भक्ति का ज्वार आ गया।

सिर मुड़वा कर रात के 12 बजे गई थी अयोध्या

उमा भारती के मुताबिक उन्हें विजयाराजे सिंधिया के साथ चित्रकूट से गिरफ्तार कर बांदा ले जाया गया, जहां 50 हजार कारसेवकों के साथ रखा गया। उन्होंने आगे लिखा है कि पूरे बांदा नगर को ही जेल मान लिया गया था। उन्हें पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस को ही जेल में तब्दील कर वहीं रखा गया। उमा भारती के मुताबिक 31 अक्टूबर की ही शाम टीवी पर हजारों कारसेवकों के कर्फ्यू तोड़कर अयोध्या पहुंचने, अशोक सिंघल के घायल होने और वासुदेव हलवाई के बाबरी ढांचे पर केसरिया पताका फहरा देने की खबर देखी। मुझे बेचैनी होने लगी कि पूरे देश में घूमकर जिनका आह्वान किया, वे सब अयोध्या पहुंच गए। जेल से भागने की योजना बना ली और सिर मुड़वा कर रात के 12 बजे बड़े भाई स्वामी प्रसाद लोधी के साथ अयोध्या के लिए निकल पड़ी।

 सुरक्षा के इतने तगड़े इंतजाम थे कि परिंदा भी पर न मार सके- उमा
उमा भारती ने कहा है कि वे सुबह 8.00 बजे मणिराम दास छावनी पहुंची गईं। पूरे रास्ते में पुलिस थी, बैरियर थे, कर्फ्यू लगा था। अयोध्या में सुरक्षा के इतने तगड़े इंतजाम थे कि परिंदा भी पर न मार सके। वह आगे बताती हैं कि 2 नवंबर 1990 को कारसेवा की तैयारी हुई। हजारों की तादाद में कारसेवकों का जत्था जानकी कुटीर के रास्ते हनुमानगढ़ी होते हुए राम जन्मभूमि की ओर चल पड़ा। अशोक सिंघल ने उन्हें जत्थे के साथ रहने के लिए कहा था।
कारसेवकों पर गोली चलने पर हर तरफ खौफनाक मंजर था
उमा भारती के मुताबिक हनुमानगढ़ी से थोड़ा पहले पुलिस थाने के पास भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें हजारों लोग घायल हुए, जिनमें खुद वो भी शामिल थी उन्हें गिरफ्तार कर अयोध्या के थाने में रखा गया। थाने में ही उन्हें मणिराम दास छावनी से कारसेवकों के दूसरे रास्ते से राम जन्मभूमि की ओर चल पड़ने की जानकारी मिली। पुलिस से संघर्ष में कुछ कारसेवकों की मौत भी हुई थी। हर तरफ खौफनाक मंजर था। उन्हें पहले फैजाबाद, फिर नैनी जेल ले जाया गया। जहां पहले से ही कल्याण सिंह और कलराज मिश्र बंद थे। उमा भारती, कुछ दिनों के बाद उन सबको रिहा कर दिल्ली भेज दिया गया।

लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ हुई थीं गिरफ्तार

इस दौरान चुनाव हुए और केंद्र में वीपी सिंह, राज्य में मुलायम सिंह की सरकार गिर गई। साल 1991 में यूपी में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने। संसद से लेकर हर तरफ यह मुद्दा राजनीति का मुख्य बिंदु बन गया। उन्होंने आगे लिखा है कि 17 नवंबर को संन्यास की दीक्षा लेने के बाद अशोक सिंघल के आह्वान पर वे 1 दिसंबर को अयोध्या पहुंचीं। 7 को वो दिल्ली लौटीं और 8 दिसंबर को उन्हें लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

Amarjeet Kaur

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