रेप पीड़िता से बोले पुलिस अफसर, पहले पहले साथ गुजारो रात, फिर करेंगे जांच … खाकी को किया कलंकित

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जब बात खाकी वर्दी की होती है, पुलिस विभाग की होती है तो उम्मीद की जाती है कि जनता की सच्ची सेवक होने के नाते पुलिसकर्मी पूरी ईमानदारी के साथ आम जनता को, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए काम करेंगे. लेकिन राजस्थान पुलिस के एक अफसर ने ऐसा कार्य किया है. जिससे राजस्थान पुलिस ही नहीं बल्कि खाकी वर्दी भी शर्मिन्दा है.

खबर के मुताबिक़, राजस्थान की राजधानी जयपुर में एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक ऐसे आरपीएस अधिकारी को गिरफ्तार किया है, जिसने रिश्वत के बदले एक महिला से उसकी अस्मत मांगी थी.टीम ने एसीबी के डीजी बी.एल. सोनी के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए जयपुर में तैनात राजस्थान पुलिस महकमे के सीनियर पुलिस ऑफिसर आरपीएस कैलाश बोहरा को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है.

कैलाश बोहरा महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में तैनात है. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला से काम के बदले रिश्वत में उसकी अस्मत मांगी थी. एसीबी के अनुसार, पीड़िता के दुष्कर्म सहित तीन प्रकरण की जांच एसीपी कैलाश बोहरा के पास थी. इस मामले की जांच में सहयोग करने के लिए आरोपी कैलाश ने अस्मत मांगी थी. पीड़िता ने बताया था कि कैलाश ने उससे कहा कि पहले उसके साथ रात गुजारो उसके बाद आगे बात करेंगे.

एसीबी के अनुसार पीड़िता की ओर से शिकायत मिलने पर इसका सत्यापन करवाया गया. इसके बाद मामला सही पाया गया. इसके बाद जैसे ही एसीपी महिला की अस्मत से खेलने की तैयारी कर रहे थे , तो ACB ने तुरंत उन्हें ट्रैप कर लिया. अभी फिलहाल एसीबी की ओर से आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर एसीबी टीम सर्च अभियान चला रहा है. इधर इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि महिला अत्याचार संरक्षण जैसे जिम्मेदार पद बैठे व्यक्ति खुद ऐसे कृत्य में शामिल हो, तो कैसे किस भरोसा किया जाए?

जरा सोचिए कि जिस महिला का बलात्कार किया गया, वह न्याय मांगने के लिए खाकी वर्दीधारी पुलिस अधिकारी के पास गई. उसे उम्मीद थी कि समाज की सेवक कही जाने वाली पुलिस उसे न्याय दिलाएगी तथा आरोपी को सजा मिलेगी लेकिन पुलिस अधिकारी ने क्या किया? रेप पीड़िता से पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह पहले उसके साथ राज गुजारे, उसके साथ बिस्तर साजा करे, इसके बाद ही वह आगे बात करेंगे.

आखिर ये कौन सी सोच है जो एक बलात्कार पीड़िता को न्याय दिलाने के एवज में उससे बलात्कार ही करना चाहती है? इससे अधिक शर्मनाक कृत्य और क्या हो सकता है? इस पुलिस अधिकारी ने शर्मिन्दा किया है पुलिस के उन अनगिनत जवानों को जो अपनी जान की परवाह किये बिना, बिना थके बिना रुके अपराधीकरण के खात्मे के लिए तथा समाज को भयमुक्त जीवन देने के लिए कार्य करते हैं. लेकिन उनकी मेहनत व ईमानदारी पर सवाल खड़े करते हैं कैलाश बोहरा जैसे पुलिस अधिकारी.
उम्मीद की जानी चाहिए कि राजस्थान सरकार व राजस्थान पुलिस आरोपी पुलिस अफसर के खिलाफ ऐसी कार्यवाई करेगी जो एक मिशाल बनेगी. अगर ऐसा होता है तो आम जनता का विश्वास पुलिस पर निश्चित रूप से बढ़ेगा और सभ्य समाज के लिए आम जनता व पुलिस के बीच आपसी विश्वास बेहद जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक जनता व पुलिस के बीच विश्वास कायम नहीं होगा, तब तक हम अपराधमुक्त समाज नहीं बना सकते हैं.

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