निजी स्कूलों ने लिया फैसला- फीस जमा ना होने पर कटेगा नाम, नहीं मिलेगा एडमिशन

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फरीदाबाद: कोरोना के चलते देश में हुए लॉकडाउन का असर सभी वर्गों पर पड़ा है। ऐसा ही एक वर्ग है निजी स्कूल जिनपर लॉक डाउन के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी इतना विपरीत असर पड़ा है कि प्रदेश के कुछ स्कूल तो बंद होने की कगार पर हैं, जहाँ एक ओर निजी स्कूलों ने लॉकडाउन के कुछ ही दिन में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी थीं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान ना हो, वहीं दूसरी ओर आम आदमी को राहत देने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार द्वारा जारी किए गए एक के बाद एक आदेशों ने हर तरफ ऊहापोह की स्थिति पैदा कर दी। इसके चलते अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की।

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कोंफेरेंस (एचपीएससी) के जिला अध्यक्ष सुरेश चंदर ने बताया कि सरकारी आदेशों में स्पष्ट ना होने के कारण प्रदेश के निजी स्कूलों को अभी तक केवल 10 से 12 प्रतिशत फीस ही मिली है, जिसमें अप्रैल से जून तक की फीस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में तो मार्च तक की फीस अदा नहीं की गई है। इस परिस्थिति को देखते हुए संस्था ने जिला स्तर पर सभी स्कूलों के साथ मिलकर भविष्य के लिए रणनीति तय करने के उद्देश से एक ऑनलाइन मीटिंग का आयोजन किया।

इस मीटिंग में मुख्य वक्ता रहे प्रदेश अध्यक्ष एसएस गुसाईं ने अपने संबोधन में कहा कि इस परिस्थिति में सबसे जरूरी यह है कि सभी मेंबर अपनी एकता का परिचय दें और किसी भी प्रकार का बयान अपने साथी स्कूलों के विषय में ना दें। उन्होंने कहा कि जब से हमारी संस्था का गठन हुआ है हमने अनेक तरह की चुनौतियों का सामना सफलता पूर्वक किया है। आवश्यकता इस बात की है कि हम एकजुट रहें और भविष्य में लिए जाने फैसलों पर आपसी विचार विमर्श करके नीति निर्धारित करें।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के स्कूलों की स्थिति देश के अन्य राज्यों से भिन्न है क्योंकि जहाँ अन्य राज्यों ने इस परिस्थिति को देखते हुए आवश्यक निर्देश समय रहते जारी कर दिए, हरियाणा सरकार किन्ही कारणों से स्पष्ट आदेश ना देकर बार बार अलग अलग आदेश जारी करती रही, इसका असर यह हुआ कि अध्यापकों ने फीस जमा नहीं की और अगले आदेशों के आने का इंतजार की बात करते हुए बहाने बनाते रहे।

नरेन्द्र परमार और अर्पण पांडा ने एक स्कूल की फीस जमा ना करते हुए दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर लगाम लाने का विषय उठाया। सभी सदस्यों के सुझाव सुनने के बाद संस्था ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए। संस्था के सचिव डॉ सुमित वर्मा ने बताया कि जो महत्वपूर्ण फैसले सर्वसहमती से लिए गए उनमें एक फैसला है कि किसी भी विद्यार्थी को स्कूल में दाखिला लेने के लिए पिछले स्कूल का ‘नो ड्यूस’ या ‘क्लीयरेंस सर्टिफिकेट’ देना पड़ेगा। इस सर्टिफिकेट के ना होने पर कोई भी निजी स्कूल ऐसे विद्यार्थी को एडमिशन नहीं देगा।

सुमित ने कहा कि इसके अलावा एकबड़ा फैसला जो इस बैठक में लिया गया, उसके अनुसार जिन विद्यार्थियों ने जून तक की फीस जमा नहीं की है, उन्हें जुलाई महीने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं में दाखिला नहीं दिया जाएगा। यह भी फैसला लिया गया कि सरकारी आदेश के अनुसार स्कूल केवल ट्यूशन फीस की ही मांग करें, अन्य मदों में की जाने वाली मांग फिलहाल स्थगित रखी जाये और परिस्थितियों के अनुकूल होने पर इस विषय में फैसला लिया जाए।

इस बैठक में साकेत भाटिया, विजय लक्ष्मी शर्मा, डॉ. सुभाष सोरायण आदि ने भी अपने विचार रखे। बैठक में ना केवल एग्जीक्यूटिव बॉडी बल्कि फरीदाबाद के स्कूलों के चेयरमैन, डायरेक्टर, प्राध्यापकों आदि ने भी भाग लिया।

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