अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान का खोया गौरव वापस लाएगी मोदी सरकार… किया ये बड़ा एलान

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भारत के इतिहास का एक गौरवपूर्ण नाम है पृथ्वीराज चौहान. यह क्षत्रिय महारथी जितना परमवीर था उतना ही दयालु और क्षमाशील था, जिसने अपने पराक्रम से हिन्दुस्तान के गौरव में बेहिसाब इजाफा किया लेकिन हाथ आए शत्रु के साथ दया करने की भूल भी कर दी. शत्रु पर दया की ये भूल हिन्दुस्तान के इतिहास पर भारी पड़ गई. वो योद्धा और कोई नहीं बल्कि दिल्ली की गद्दी के आखिरी हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान हैं. पराक्रम और साहस जिनके हथियार थे तथा दया करुणा और जिनके श्रृंगार … ऐसे थे हमारे पृथ्वीराज चौहान.

देश के अंतिम हिंदू सम्राट के नाम से विख्यात अग्निवंशी राजा पृथ्वीराज चौहान नाम जेहन में आते ही हर सनातनी की भुजाएं भड़कने लगती हैं, रगों में बहने वाला लहू लावा बनकर दौड़ने लगता है, सनातन की गौरवशाली भगवा पताका आसमान में शान से फहरती हुई दिखाई देने लगती है, वीर भोग्या वंसुधरा का उद्घोष स्वतः ही होने लगता है, हर सनातनी का सर पृथ्वीराज चौहान के आगे अपने आप नतमस्तक हो जाता है, लेकिन पहले मुगलिया सत्ता फिर अंगरेजी सत्ता और उसके बाद देश की सेक्यूलर सत्ता ने देश की आन बान और शान पृथ्वीराज चौहान को इतिहास के पन्नों से या तो मिटा दिया या लोगों के सामने ही नहीं आने दिया, ताकि हिन्दुस्तानी लोग अपने पूर्वजों के बारे में जान ही न सकें.

लेकिन अब केंद्र की मोदी सरकार अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के खोए गौरव व खोये सम्मान को वापस लाने जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI दिल्ली में उनके नाम पर संग्रहालय बनाने जा रहा है. किला राय पिथौरा में ये संग्रहालय बनाया जाएगा . किले में पहले से बनी इमारत का विस्तार करते हुए इसके निर्माण के लिए योजना तैयार कर ली गई है. ये संग्रहालय चक्रवर्ती हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान को समर्पित होगा. ASI ने अपने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि जहाँ कहीं भी पृथ्वीराज चौहान से सम्बंधित दस्तावेज हों, या फिर कोई सामग्री हो- उन्हें एकत्रित किया जाए, ताकि संग्रहालय में रखा जा सके. अगले एक वर्ष में इस संग्रहालय के तैयार हो जाने की सम्भावना है.

बता दें कि इससे पहले अटल सरकार में जगमोहन के केंद्रीय शहरी विकास मंत्री के कार्यकाल में किला राय पिथौरा का कायाकल्प किया गया था. पहले यह एक उपेक्षित टीले की तरह था, जहाँ आसपास काफी सारी झुग्गियाँ थीं. दिल्ली विकास प्राधिकरण DDA को सक्रिय करते हुए जगमोहन ने यहाँ गन्दगी हटा कर इलाके के विकास के लिए कार्य किया. उन्होंने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बनने के बाद न सिर्फ इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया, बल्कि खुदाई की भी व्यवस्था की. यहाँ संरक्षण केंद्र भवन का निर्माण हुआ, जहाँ पृथ्वीराज चौहान की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई.

अब इस संरक्षण केंद्र का विस्तार किया जा रहा है. प्रदूषण के कारण इस पर रोक लगी हुई थी, लेकिन अब इसके आसपास हरा-भरा और सुंदर पार्क विकसित किया जाएगा. 2002 में ही इस पार्क को DDA ने ASI को सौंप दिया था. जगमोहन ने अपनी पुस्तक में बताया है कि किस तरह दिल्ली के राजसिंहासन पर बैठने वाले चौहान ने लालकोट का विस्तार करते हुए एक विशाल किला बनाया था. यहाँ कई मंदिर भी थे, जिसे इस्लामी आक्रांताओं ने ध्वस्त कर दिया था.

कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद के लिए मुख्यतः इन्हीं ध्वस्त मंदिरों के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था. कुतुबुद्दीन तथा इल्तुतमिश ने राय पिथौरा के दुर्ग को ही अपना निवास स्थान बनाया और अमीर खुसरो ने भी अनंगपाल महल का वर्णन किया है. पृथ्वीराज चौहान ने अंतिम हिंदू सम्राट के रूप में दिल्ली में सुदृढ़ केंद्रीय सत्ता की स्थापना की, जो मुसलमानों के विरुद्ध प्रतिरोध की कहानियों के लोकप्रिय नायक रहे हैं. लाल कोट का विस्तार उन्होंने आसपास पत्थरों की विशाल प्राचीरें और द्वार बनाकर किया। यह दिल्ली का प्रथम नगर किला राय पिथौरा के नाम से विख्यात है. किला राय पिथौरा दिल्ली के 7 शहरों में प्रथम है और इसका निर्माण 12वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ था. राय पिथौरा की दिल्ली के 12 दरवाजे हुआ करते थे. मुख्यरूप से प्रेस एंक्लेव रोड पर राय पिथौरा के किले के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं.

ज्ञात हो कि मोईनुद्दीन चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे. उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे. यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए थे. मजहबी तुष्टीकरण की राजनीति की भेंट चढ़े चक्रवर्ती हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शौर्य, पराक्रम तथा केसरिया के प्रति उनके समर्पण को अब देश की जनता जाने, अपने इतिहास को पहिचाने, इसके लिए पीएम मोदी की सरकार ने काम शुरू कर दिया हैं, इसके लिए सरकार का धन्यवाद किया ही जाना चाहिए .

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