पीजीआई गार्ड घोटाला: फाइल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कर्मचारी पीजीआई थाने के चक्कर काट रहे हैं

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रोहतक: पीजीआई गार्ड घाटाले में नया मोड़ आ गया है। सुरक्षा अधिकारी और सहायक सुरक्षा अधिकारी की नौकरी जाने के बाद बहुचर्चित गार्ड घोटाले की फाइल गायब हो चुकी है। हैरान करने वाली बात है कि फाइल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कर्मचारी पीजीआई थाने के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन पुलिस ने साफ इनकार कर दिया है.

पुलिस का कहना है

संवेदनशीन मामला है गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी। अपने अधिकारियों से पूरी प्रक्रिया के तहत लिखवाकर लाओ तो जांच की जाएगी। ऐसी फाइलों की गुमशुदगी की रिपोर्ट नहीं होती। इस तरह फाइल चोरी या गायब होना सीधे तौर पर बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा है. 26 जून को ईसी की बैठक में एजेंडा पास करके मुख्य सुरक्षा अधिकारी बादाम सिंह और सहायक सुरक्षा अधिकारी संजय सांगवान को नौकरी से डिसमिस कर दिया था। अंदेशा था कि इस मामले में कई और नाम सामने आएंगे, लेकिन इससे पहले ही फाइल गायब हो गई। बता दें कि 103 कर्मचारियों का वेतन फर्जी तरीके से वसूलने का आरोप सुरक्षा का ठेका लेने वाली कंपनी पर लगा था। करीब 80 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी.

2017 में सामने आया मामला

सुरक्षाकर्मी मुहैया करवाने वाली नई दिल्ली की एक कंपनी को सुरक्षा का ठेका मिला था। कंपनी ने अक्टूबर 2015 से हेल्थ यूनिवर्सिटी में सुरक्षा मुहैया कराई। एक्सटेंशन मिलने के बाद गड़बड़ी का अंदेशा होने पर अप्रैल 2017 को कंपनी से कर्मचारियों की जानकारी मांगी। कंपनी जानकारी नहीं दी सकी। इसके बाद गार्ड और सुपरवाइजर्स की फिजिकल वेरिफिकेशन कंपनी की ओर से दिसंबर 2016 को जमा कराए गए बिल के आधार पर शुरू की गई.

बैंक डिटेल ने खोला राज 

कर्मचारियों की बैंक डिटेल खंगाली गई तो सामने आया कि डिटेल एसबीआई मेडिकल रोहतक की न होकर भिवानी की हैं। गौर करने लायक है कि यही कंपनी भिवानी शिक्षा बोर्ड में भी गार्ड मुहैया करवाती थी। बोर्ड से भी उनके सुरक्षा कर्मचारियों की डिटेल मांगी गई। दोनों िउटेल का मिलान किया तो फर्जीवाड़ा सामने आया.

भिवानी और रोहतक दोनों जगह दिखाए कर्मचारी

जांच में जांच में फजीर्वाड़ा सामने आया कि 103 सुरक्षाकर्मियों को पीजीआई में तैनात दिखाया गया था, जबकि वे भिवानी शिक्षा बोर्ड में ड्यूटी कर रहे थे और वहीं से उनका वेतन भी लिया जा रहा था। इसके अलावा पीजीआई से भी उन सुरक्षा कर्मियों का वेतन लिया जा रहा था, करीब 80 लाख रुपये की गड़बड़ी अब तक हो चुकी थी.

26 जून को ईसी की बैठक हुई

इसमें एजेंडा नंबर पास किया गया। 2017 से बर्खास्त चल रहे बादाम सिंह और संजय सांगवान को नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया। बादाम सिंह 30 जून के सेवानिवृतत होने वाले थे, जबकि संजय सांगवान का 6 साल का कार्यकाल बचा हुआ था। बड़ा सवाल ये है कि इस मामले में किसे बचाने की कोशिश की जा रही है। 26 जून के बाद फाइल किसके पास थी और कैसे गायब हो गई.

                                                                                                          दीपक शर्मा

 

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