5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार … 5 साल में नीलाम होगी 5 लाख करोड़ की सरकारी संपत्ति

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. कोरोना के कारण सरकार की कमाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसके बावजूद सरकार अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटी है. इस बीच केंद्र ने अगले चार सालों अर्थात 2025 तक निजीकरण के जरिए 5 लाख करोड़ रुपए का भारी भरकम फंड इकट्ठा करने की योजना बनाई है. इसके लिए नीति आयोग 100 महत्वपूर्ण सरकारी संपत्ति की पहचान भी कर ली है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग ने अलग-अलग मंत्रालयों से कहा है कि वे निजीकरण करने लायक संपत्ति की पहचान करें. नीति आयोग निजीकरण की दिशा में सरकार को तेजी से बढ़ने का सुझाव दिया है. इसलिए तमाम प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी शुरू करने का निर्देश जारी किया गया है. नीति आयोग ने 100 सरकारी संपत्ति की पहचान कर ली है.

निजीकरण के जरिए इससे सरकारी खजाने में 5 लाख करोड़ आने का अनुमान है. 10 अलग-अलग मंत्रालयों और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज की 31 महत्वपूर्ण संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और इसकी लिस्ट भी संबंधित मंत्रालयों को सौंपी जा चुकी है. इन सरकारी संपत्तियों में टोल रोड, पोर्ट, क्रूज टर्मिनल, टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस पाइपलाइन, ट्रांसमिशन टॉवर, रेलवे स्टेशन, स्पोर्ट्स स्टेडियम, माउंटेन रेलवे, ऑपरेशनल मेट्रो सेक्शन, वेयरहाउसेस और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं.

बता दें कि जिन 100 कंपनियों को चिन्हित किया गया है उनमें से 70 सरकारी कंपनियां घाटे में हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में इन स्टेट रन कंपनियों का कुल घाटा 31635 करोड़ रुपए रहा था. सरकार घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को पूरी तरह और जल्द से जल्द बंद करने को बेताब है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि घाटे में चल रही सरकारी कंपनियां टैक्सपेयर्स के पैसे पर बोझ की तरह हैं.

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