अर्थव्यवस्था में जान फूंकने को मोदी सरकार ने बनाया प्लान … रेलवे और टेलिकॉम की संपत्ति बेचकर जुटाए जाएंगे 1.3 लाख करोड़

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मोदी सरकार विनिवेश, निजीकरण और संपत्ति के मुद्रीकरण की नीति पर सवार होकर अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की तैयारी में है. पीएम मोदी ने अगले तीन सालों में असेट मोनेटाइजेशन की मदद से 2.5 लाख करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है. सरकार लक्ष्य का आधा यानी 1.3 लाख करोड़ रुपए रेलवे और टेलिकॉम सेक्टर में असेट मोनेटाइजेशन से इकट्ठा करना चाहती है.

वहीं वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सरकार ने विनिवेश और निजीकरण का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि सोच विचार कर सरकारी कंपनियों के निजीकरण से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा. निजीकरण के बाद बेकार पड़ी संपत्ति का सही उपयोग होगा. सरकार ने 100 से अधिक ऐसी संपत्ति की पहचान कर ली है जिसकी आने वाले समय में बिक्री की जाएगी.

इसी सप्ताह नीति आयोग की तरफ से एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया था. इस वर्कशॉप की अध्यक्षता निर्मला सीतारमण की थीं. उनके अलावा अलग-अलग मंत्रालयों को टॉप ब्यूरोक्रैट इस वर्कशॉप में शामिल हुए थे. असेट मोनेटाइजेशन को लेकर पीएम मोदी की घोषणा के बाद नीति आयोग इस काम को अंजाम देने में जुट गया है. इसके लिए वह अलग-अलग मंत्रालयों और डिपार्टमेंट से संपर्क साधे हुए है.

नीति आयोग ने रेलवे के असेट मोनेटाइजेशन की मदद से 90 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा BSNL और MTNL के टेलिफोन टॉवर और ऑप्टिकल फाइबर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेचकर 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.

सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की BNSL को वित्त वर्ष 2023-24 से प्रॉफिट में आने की उम्मीद है. यह रिवाइवल पैकेज के तहत प्रस्तावित योजनाओं और रणनीतियों के लागू होने पर निर्भर करेगा. बीएसएनएल EBITDA के लिहाज से प्रॉफिट में है. EBITDA का मतलब ब्याज, टैक्स, डेप्रिशिएशन और ‘एमोर्टाइजेशन’ से पूर्व आय से है.

सरकार ने अक्टूबर 2019 में बीएसएनएल और एमटीएनएल को पटरी पर लाने की रिवाइवल पैकेज को मंजूरी दे दी. इसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, 4जी स्पेक्ट्रम के लिए समर्थन, प्रमुख और गैर-प्रमुख संपत्तियों को बाजार पर चढ़ाना (बेचना या पट्टे पर देना), सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा पूंजी जुटाने के लिये बांड के लिये सरकारी गारंटी और एमटीएनएल और बीएसएनएल का अल्पकाल में विलय शामिल हैं.

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