रमजान में इफ्तारी तो नवरात्र में फलहारी क्यों नहीं

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दिल्ली- आज जहाँ भारत मे सभी पार्टियों के नेताओ द्वारा अपने वोट बैंक को बढाने के लिए रमज़ान के महीने में रोजा इफ्तारी देने की होड़ सी लग जाती है और भारत के बहुसंख्यक समाज हिन्दूओ के पावन त्योहार नवरात्रो में कोई भी पार्टी और न कोई नेता फलाहार जैसे आयोजन नही कराते है हालांकि वही इस तरह की पीड़ा को महसूस किया एक राष्ट्रवादी हिन्दूवादी संगठन सुदर्शन वाहिनी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद विनोद ने और इस मुद्दे को बताया की रमज़ान में रोजा इफ्तारी तो नवरात्रो में फलाहार क्यो नही क्या वोट केवल मुश्लिम देते है हिन्दू नही उन्होंने कहा हमको कोई एतराज नही की आप अपने वोट बैंक के लिए क्या करते है लेकिन पीड़ा तो ये है कि भारत के बहुसंख्यक समाज हिन्दू के साथ राजनीतिक तुष्टिकरण क्यो किया जा रहा है इस लिए उन्होंने करीब 3 साल पहले अपने सोशल मीडिया के सहयोगियो के साथ मिलकर इस अभियान को चलाया ओर अब वह भारत के कई हिस्सों में फलाहार का आयोजन करवाते है अपने सहयोगियों के साथ ओर इस वर्ष बड़े पैमाने पर इसका प्रचार प्रसार हुआ है

हालांकि इस त्यौहार को पुरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ बनाया जाता है कोई नौ दिन निर्जला पानी पिए तो कोई अपने शरीर में जवारे रखकर इस उपास को करता है और नौ दिन दुर्गा प्रतिमा रखकर उसकी पूजा अर्चना करते है जहा भक्त इस त्यौहार को पूरी श्रद्धा से बनाते है तो वही कोई भंडारा करवाता है तो कोई कुवारी कन्याए को खाना खिलाते है. वैसे तो चाहे कोई पार्टी हो या कोई नेता हो जब चुनाव आते है तो करोडो रुपये खर्च करते है तो कही किसी को पैसा बाटते है और कही पंडाल लगाकर लोगो को फ्री खाना खिलाते है जिससे उन्हें वोट मिल सके. सभी पार्टी के नेता पैसा की दम पर जनता को लुभाते है लेकिन बात तो यह है की नेता जहा करोडो रुपये वोट मांगने के लिए खर्च कर देते है तो वही हिन्दू धर्म के इस पावन त्यौहार नवरात्रो में फलहारियो को न तो किसी प्रकार का फल न कोई भण्डारा और न ही मंदिरो में दान देते है वैसे अगर देखा जाये तो नेता जो चुनाव में वोट के लिए कई प्रकार के आयोजन करते है तो नवरात्र में फलहारियो के लिए क्यों नहीं है. ऐसे में नेता सिर्फ दिखावा करते है

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