दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है जिन आतंकियों को वो भारत को बनाना चाहते थे इस्लामिक राष्ट्र्र, देवबंद में हुई थी ट्रेनिंग

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दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मो. अशरफ खटाना के मोबाइल फोन कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. दोनों आतंकियों के फोन से पता चला है कि वे ‘जिहाद’ नाम से एक वाट्सएप ग्रुप से जुड़े थे. इस ग्रुप में उनके अलावा दिल्ली का रहने वाला एक शख्स भी शामिल था.  इस वाट्सएप ग्रुप की चैट में उनके साथ दिल्ली का रहने वाला एक शख्स भी जुड़ा हुआ था. उस शख्स की लोकेशन कई बार बांग्लादेश बॉर्डर और यूपी के देवबंद इलाके में भी मिली है.

इसके बाद पुलिस समेत इंटेलिजेंस एजेंसियां उस तीसरे शख्स की तलाश में जुट गई हैं. पूछताछ में पता चला कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी अब्दुल लतीफ मीर व मो. अशरफ खटाना को आतंकी ट्रेनिंग के लिए दिल्ली से देवबंद जाना था. देवबंद में इनको हथियार चलाने और विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग दी जानी थी. देवबंद में ट्रेनिंग के बाद ये आतंकी नेपाल के रास्ते पाकिस्तान जाने की फिराक में थे.

दिल्ली पुलिस दिल्ली व यूपी में छिपे इनके संपर्कों की तलाश कर रही है. पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर ने इनको कहा था कि देवबंद में उन्हें उनका आदमी मिलेगा जो आतंक की छोटी ट्रेनिंग दिलवाएगा. इसके बाद बड़ी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भिजवाएगा. दोनों युवक करीब आठ महीने पहले जेहादी बने थे अब दौरा-ए-खास की ट्रेनिंग लेकर आतंकी बनना चाहते थे.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि ये चिंता की बात है कि यूपी में आतंकी ट्रेनिंग दी जा रही है. ये बात भी देखने में आई कि पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने यूपी से ही हथियार लिए थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों संदिग्ध पिछले करीब आठ महीने से जेहादी बने थे. अब यह आंतकी बनना चाहते थे. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये धारा 370 खत्म करने के बहुत खिलाफ हैं और जम्मू कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए लड़ना चाहते हैं.

दोनों आंतकी अक्सर यूट्यूब पर मसूर अजहर के जहरीले भाषण सुनते थे. जम्मू कश्मीर की आजादी तथा भारत समते पूरी दुनिया में इस्लामिक हुकूमत के लिए वे जिहाद करना चाहते हैं. डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि अब्दुल लतीफ मीर ने फेसबुक प्रोफाइल पर दुर्दांत आतंकी मसूद अजहर का फोटो लगा रखा है. वहीं, अब्दुल अरसद मदनी, फैजुल वाहिद, मुफ्ती मुजफर हुसैन व नजीर साहा के कट्टरपंथी व्याख्यान सुनता था.

दोनों को इनके भाषणों ने आतंक की राह पर चलने की प्रेरणा दी. अब्दुल लतीफ मीर व मो. अशरफ खटाना कश्मीर में कई अन्य कट्टरपंथी युवाओं के साथ चोरी छिपे प्रशिक्षण प्राप्त किया. चार महीना पहले दोनों लाहौर, पाकिस्तान में रहने वाले आफताब मलिक से फेसबुक मैसेंजर के जरिये संपर्क में आए. उसने अब्दुल को वाट्ससऐप नंबर के बारे में पूछा और उसे फोन किया था.

उसने अब्दुल लतीफ मीर से मसूद अजहर को प्रोफाइल फोटो लगाने के बारे में पूछा था जिस पर उसने आफताब मलिक को बताया था कि वह जैश-ए-मुहम्मद चीफ की पूजा करता है. तलाशी के दौरान दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, कपड़ों का बैग, मो. अशरफ खटाना का मदरसा का आईकार्ड, जेएंडके बैंक का डेबिट कार्ड, अब्दुल लतीफ मीर का वोटर कार्ड, जेएंडके ग्रामीण बैंक का डेबिट कार्ड.

इसके अलावा मोबाइल से आपत्तिजनक जेहादी ऑडियो, वीडियो फाइल व साहित्य मिला है. स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब्दुल लतीफ मीर के पिता सोपोर जिला कोर्ट में मुंशी हैं. पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद मदरसा खेरम्बार, श्रीनगर चला गया था. अशरफ खटाना के पिता भी सरकारी सेवा से रिटायर हैं. वर्ष 2012 में इसने पढ़ाई छोड़ दी और इसके बाद अब्दुल लतीफ के पास चला गया.

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