आतंकवाद के बाद अब नक्शलवाद पर किया जायेगा प्रहार , 10 राज्यों संग अहम बैठक कर रहे अमित शाह

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जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद मोदी जिस प्रकार आतंकवाद पर शिकंजा कस दिया है अब उसी प्रकार देश में फैले माओवाद व् नक्शलवाद की कमर तोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है,भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में खा है की अब इस देश में आतंकवाद , नक्शलवाद के लिए कोई जगह नहीं है अब देश बदल चुका है.

अमित शाह ने कहा कश्मीर में हालात सामान्य होने में समय लगेगा
उन्होंने लिखा, ‘‘देश में संविधान लागू होने के लगभग 69 साल बाद धारा 370 की समाप्ति के बाद वहां हालात सामान्य होने में थोड़ा समय लगेगा। इसका थोड़ा इंतजार किया जाए तो बेहतर है, जिसको माननीय कोर्ट ने भी माना है।’’

उत्तर परतादेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा की विपक्षी पार्टिया राजनीती करने के लिए गयी थी जम्मू कश्मीर।

मायावती ने ट्वीट के जरियर लिखा है की , ‘‘ऐसे में अभी हाल ही में बिना अनुमति के कांग्रेस और अन्य पार्टियों के नेताओं का कश्मीर जाना क्या केंद्र और वहां के गवर्नर को राजनीति करने का मौका देने जैसा इनका यह कदम नहीं है? वहां पर जाने से पहले इस पर भी थोड़ा विचार कर लिया जाता, तो यह उचित होता।’’
यह बैठक नक्सल प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्री या फिर उनके प्रतिनिधियों के साथ ही शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ होनी है। इसमें अर्धसैनिक बलों और गृह मंत्रालय से जुड़े शीर्ष अधिकारी भी हिस्सा लें रहें।

इससे पहले गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘गृह मंत्री नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यो की समीक्षा करेंगे।’ नक्सल प्रभावित देश के 10 राज्यों में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2009-13 के बीच नक्सली हिंसा के 8782 मामले सामने आए। इस दौरान सुरक्षा बलों सहित 3,326 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 2014-18 के बीच नक्सली वारदातों की संख्या घटकर 4,969 हो गई। इस दौरान सुरक्षा बलों सहित 1,321 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 2009-18 के बीच 1,400 नक्सली मारे गए थे। वहीं इस साल पहले पांच महीनों में नक्सली हिंसा की 310 घटनाएं हुईं, जिसमें 88 लोग मारे गए।

गृह राज्य मंत्री जय किशन रेड्डी ने पिछले महीने कहा था कि सरकार की नीतियों के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों के प्रसार और हिंसा में कमी आई है। यही वजह है कि 2018 में नक्सल प्रभावित सिर्फ 60 जिलों से हिंसा की खबरें सामने आई। इनमें से भी 10 जिलों में ही इस तरह की दो-तिहाई घटनाएं हुई।

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