औरंगजेब हैं अखिलेश … दलितों से करते हैं हद दर्जे की नफरत, उन्हें अंबेडकर नहीं आलम से है प्यार

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अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं. जिसने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति से बेदखल कर उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया. ऐसे मुगल शासक की विचारधारा के लोगों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी. विधानसभा चुनाव में कहीं दूर-दूर तक अखिलेश यादव दिखाई नहीं पड़ेंगे. ये बातें यूपी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान लखनऊ में कही हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव दलितों से हद दर्जे की नफरत करते हैं, उन्हें अंबेडकर से नहीं बल्कि आलम से प्यार है.

अखिलेश यादव को लेकर डॉ. निर्मल ने आगे कहा कि आंबेडकर के मानने वालों से अखिलेश यादव नफरत करते हैं. वह केवल वोटबैंक के लिए समय-समय पर दिखावा करते रहते हैं. अखिलेश सरकार में कुल 195 लोगों को यशभारती पुरस्कार दिए गए, इसमें से एक भी दलित विद्वान नहीं थे यह दिखाता है कि वह केवल मुगल मानसिकता से काम करते हैं. कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी जो लखनऊ में है उसका नाम बदल कर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी कर दिया गया है, जबकि बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर की पत्नी के नाम पर बने रमाबाई नगर जिले का नाम बदल कर कानपुर देहात कर दिया.

डॉ. निर्मल ने अखिलेश यादव की राजनीति को परिवार और एक जाति विशेष की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में दलितों का कोई स्थान नहीं है. उनकी पार्टी में अनुसूचित जाति मोर्चे का कोई अध्यक्ष तक नहीं है. यही हाल उनकी उत्तर प्रदेश की सरकार में भी था. दलितों की आवाज को दबा दिया जाता था. मायावती से निजी शत्रुता का बदला अखिलेश यादव ने दलितों से लिया. दलितों से इतनी नफरत थी कि उन्होंने गैरदलितों को अनुसूचित जाति आयोग और वित्त निगम का अध्यक्ष तक बना दिया.

अखिलेश यादव तो अपना जन्मदिन तक देश में नहीं मनाते हैं. ऐसे नेताओं को हमारा गरीब, किसान, हाशिए का समाज हवाई नेता समझता है. वह दिन दूर नहीं, जब अखिलेश यादव पूरे देश में कहीं से भी चुनाव नहीं जीत पाएंगे. वह चुनाव जीतने के लिए, ऐसा लोकसभा क्षेत्र चुनते हैं जहां उनके जातियों की संख्या सबसे अधिक हो, लेकिन उनका सजातीय समाज भी अब जान गया है कि वह वोट भले ही पूरे समाज का लेते हैं, लेकिन वह केवल परिवार की राजनीति करते हैं. केवल परिवार का ही भला करते हैं.अब तो उनके परिवार में भी केवल 2 ही सांसद रह गए हैं.

डॉ. निर्मल ने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब जातिवादी राजनीति और परिवारवादी पार्टियों को नकार दिया गया. फर्जी समाजवाद और फर्जी बहुजनवाद के खतरों से वे पूरे प्रदेश के दलित समाज को अवगत कराएंगे. समाजवाद और बहुजनवाद के नाम से दलितों-पिछड़ों को छलने वाले क्षेत्रिय दलों ने प्रदेश में जातिवाद को मजबूत कर आर्थिक साम्राज्य और परिवारवाद को बढ़ाने का काम किया.

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