इरफान खान के वो 5 बयान जिसे सुन भड़क उठे थे मजहबी कट्टरपंथी, जो आज उनके निधन पर भी मना रहे हैं जश्न

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता इरफ़ान खान के निधन पर देश में शोक की लहर दौड़ गई है. इरफ़ान खान वो अभिनेता हैं जो अपनी एक्टिंग के अलावा अपनी प्रखर राष्ट्रवादी व मानवीयता भरी सोच को लेकर हमेशा याद किये जाएंगे. यही कारण है कि आज जैसे ही इरफ़ान खान के निधन की खबर सामने आई, लोगों के आंसू निकल पड़े. धर्म-मजहब से परे सभी लोग नेक दिल इरफ़ान खान को सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
लेकिन इस बीच कुछ इस्लामिक चरमपंथी सोच रखने वाले अराजक तत्वों ने इरफ़ान खान के निधन पर अपनी संकीर्ण सोच का परिचय दिया है. ये लोग अभिनेता इरफ़ान खान की मौत का न सिर्फ मजाक बना रहे हैं बल्कि अभद्र टिप्पणियां भी कर रहे हैं. दरअसल इसके पीछे इरफ़ान खान की वो सोच है जो कभी कट्टरपंथियों को रास नहीं आई.
इरफ़ान खान हमेशा से कट्टरपंथ का विरोध करते रहे. इरफ़ान खान के ऐसे ही 5 बयान हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथी भड़क उठे थे तथा इरफ़ान खान को काफी भला-बुरा कहा था. आम मुस्लिम ही नहीं बल्कि कई इस्लामिक मौलाना/मौलवियों ने इरफान खान पर ज़ुबानी हमला बोला था.

इरफान खान के वो 5 बयान जिससे भड़क उठे थे इस्लामिक कट्टरपंथी–

1- बकरे की कुर्बानी गलत: इरफान खान ने एक समाय कहा था कि बकरीद पर बकरे की कुर्बानी बंद होनी चाहिए. कुर्बानी तो अपनी सबसे प्यारी चीज की होती है. ये क्या बात हुई कि बाजार से दो बकरे खरीदकर लाए उन्हें काट दिया और कहने लगे कि हमने खुदा की खुशी के लिए इनकी जान ले ली. किसी दूसरे जानवर को मारकर किसी इंसान को कैसे पुण्य मिल सकता है? कुर्बानी तो उस चीज की देते हैं जो आपको सबसे प्रिय होती है. बकरीद के पीछे के असली मकसद को समझो. फर्ज और शबाब को सीध-सीधा दुकानदारी मत बनाओ.

2- भूखे रहना रोजा नहीं: इस्लामिक त्यौहार रमजान को लेकर अभिनेता इरफान खान ने कहा था कि भूखे रहना रोजा नहीं बोता, बल्कि इसका असली मकसद अपने अंदर झांकना है. हमारे यहां जितनी भी परंपराएं और त्योहार हैं हम उनका असली मतलब भूल गए हैं. हमने उनको तमाशा बना दिया है.

3- सर्कस बना दिया है मुहर्रम को: इरफान ने कहा कि मुहर्रम एक दुख का मौका होता है, लेकिन कुछ लोगों ने इस मौके को भी सर्कस में बदल दिया है.

4- दहशतगर्दी के खिलाफ बोलें मुस्लिम: इस्लाम के नाम पर किये जा रहे आतंक तथा दहशतगर्दी पर इरफान खान ने कहा था कि मुसलमानों को इस्लाम के नाम पर मचाई जा रही दहशतगर्दी के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए. अभी मुसलमान आवाज़ क्यों नहीं उठा रहे हैं? उनके मजहब नाम पर दहशतगर्दी हो रही है तो यह मुसलमानों का धर्म बनता है कि उसके खिलाफ आवाज उठाएं.

5- मौलवियों मुझे डराओ मत: प्लीज भाइयों, आप जो मेरे बयान से दुखी हो, या तो आप आत्मचिंतन करने को तैयार नहीं हो या आप बिना सोचे-समझे नतीजे पर पहुंच जाने की हड़बड़ी में हो. मेरे लिए धर्म का मतलब आत्मचिंतन है. इससे दया और बुद्धि प्राप्त होती है. इसका पोंगापंथी या कट्टरपंथ से कोई वास्ता नहीं। मौलवियों मुझे डराओ मत!!! मैं भगवान का शुक्र अदा करता हूं कि मैं ऐसे देश में नहीं रहता जिसे मज़हब के ठेकेदार चलाते हों. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश में रहता हूं जहाँ सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है.

सबसे बड़ी बात ये थी कि इरफान खान ने पठान मुस्लिम परिवार में जन्म होने के बाद भी कभी मीट या मांस नहीं खाया था और वे बचपन से ही शाकाहारी थे. यही कारण है कि उनके पिता इरफान को कहा करते थे कि ये तो पठान परिवार में एक ब्राह्मण पैदा हो गया है.
इरफ़ान खान की यही खासियत थी कि वह जितने अच्छे अभिनेता थे, उनके विचार भी उतने ही अच्छे थे. इन्हीं विचारों के कारण इरफान खान कभी इस्लामिक कट्टरपंथियों को रास नहीं आए. जब इरफ़ान ने ये बयान दिए, कट्टरपंथियों के इरफान को जी भरकर कोसा. और आज जब इरफ़ान खान का निधन हो गया है तो तमाम मजहबी कट्टरपंथी न सिर्फ उनके निधन पर जश्न मना रहे हैं बल्कि बेहद ही अभद्र टिप्पणियां भी कर रहे हैं.

 

SVN Times बॉलीवुड के दिग्गज व सदाबहार अभिनेता, एक जिंदादिल इंसान तथा सच्चे हिन्दुस्तानी इरफान खान के निधन पर उन्हें शतत श्रद्धांजलि समर्पित करता है तथा ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें, उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

अलविदा इरफान खान

— अभय प्रताप सिंह चौहान

 

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