लेडी कांस्टेबल की आंखों में मिर्च डालकर फलौदी जेल से 16 कैदी फरार

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जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर जिले की फलौदी जेल से सोमवार को 16 कैदी फरार हो गए। इसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरंत जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह को इस घटना की जानकारी दी गई। जिनके निर्देशन के बाद फलौदी के विभिन्न रास्तों पर सघन नाकेबंदी की गई है। यहां से निकलने वाले हर वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। इसे प्रदेश का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा फरारी कांड बताया जा रहा है। इससे पहले फरवरी, 2010 में चित्तौड़गढ़ की जिला जेल से एक साथ 23 कैदी फरार हो गए थे।

उप जिला कलेक्टर यशवंत आहूजा ने बताया

कि फलोदी जेल की महिला सुरक्षा प्रहरी की आंखों में मिर्च डालकर यह कैदी फरार हो गए। उन्होंने बताया कि जब शोर शराबा हुआ तो जेल कर्मियों ने जाकर देखा तो सब्जी बिखरी हुई थी और एक महिला प्रहरी तड़प कर चिल्ला रही थी। उसने बताया कि कैदियों ने उसकी आंखों में मिर्ची डाली और फरार हो गए।

यह कैदी हुए फरार

इस घटना में सुखदेव, शौकत अली और अशोक 302 यानी हत्या के मामले में विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदी थे। प्रदीप 304 यानी हत्या के प्रयास का आरोपी था। इसके अलावा जगदीश प्रेम अनिल मोहन राम श्रवण मुकेश और शिवप्रताप एनडीपीएस मामले यानी कि मादक पदार्थ तस्करी के मामले में सजायाफ्ता वह विचाराधीन कैदी थे।

पूरे इलाके में सघन नाकेबंदी

कैदियों के भागने की सूचना मिलते ही उप जिला कलेक्टर ने जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह को इस घटना की जानकारी दी। उनके निर्देशन के बाद फलौदी के विभिन्न रास्तों पर सघन नाकेबंदी की गई है। यहां से निकलने वाले हर वाहन की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। फिलहाल इन कैदियों को पकड़ने में पुलिस को सफलता नहीं मिली है।

अंदर का गेट खोला, बाहर के गेट में ताला नहीं था

जेल के दो गेट हैं। बंदियों को बैरकों में डालने व निकालने के वक्त दोनों में से एक पर ताला होना चाहिए, लेकिन सोमवार को घटना के वक्त बाहरी गेट पर ताला नहीं था और अंदर का गेट वैसे ही खोला गया था। ऐसे में बंदियों के सामने न दीवार फांदने की नौबत आई और न ही कोई हथियार चलाने की। कचहरी परिसर में उपकारागृह सिर्फ विचाराधीन बंदियों को रखने के लिए है। 40 x 60 फीट के एरिया में ही यह जेल बनी हुई। यहीं एसडीएम कोर्ट है। इतनी छोटी सी जगह में तीन बैरक हैं, साथ ही जेल का ऑफिस व कर्मचारियों के रहने के क्वार्टर हैं।

17 की क्षमता, बंदी 60 थे, स्टाफ 16 में से सिर्फ 4

जेल में बंदी क्षमता 17 की है, लेकिन जेल में हमेशा ही बंदी ज्यादा रहते हैं। सोमवार को जेल में 60 बंदी थे। जेलर सहित 16 का स्वीकृत स्टाफ है, लेकिन नियुक्त 9 ही हैं। 3 मार्च काे जेलर निलंबित होने से यह पद भी रिक्त है। वारदात के समय 4 कर्मचारी ही थे जबकि 5 अवकाश पर बताए गए हैं। जेल की सुरक्षा के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था नहीं है।

एसडीएम ऑफिस में थे, लेकिन सूचना नहीं दी

जेल एसडीएम ऑफिस से 20 फीट दूर सामने है। उस वक्त एसडीएम यशपाल आहुजा ऑफिस में ही थे, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें वारदात की सूचना नहीं दी। न शोर मचाया और न ही बंदियों का पीछा करने की कोशिश की।

                                                                                                  DEEPAK SHARMA

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