असत्य पर सत्य की विजय पहलू खान केश में बंद सभी 6 निर्दोष हुए बाइज्जत बरी

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  1. कहते है सत्य भयभीत हो सकता है किंतु पराजित नही जी हाँ इस कथन को सत्य साबित किया एक मॉबलीचिंग कि घटना ने
    जिसमे फसाये गए लोगो पर अपराध सिद्ध नही हुआ न्यायालय ने भी यही कहा कि जिसने अपराध किया ही नही उन लोगों को फसाया गया है जी हाँ आज हम बात कर रहे एक ऐसी घटना को जो कुछ दिन पहले अखबारों टीवी चैनलों की मुख्य सुर्खियों में हुआ करती थी घटना राजस्थान के अलवर जिले की है जहाँ एक गौतस्कर को भीड़ के द्वारा मार दिया गया था जिसका नाम पहलू खान था

    वहीं पहलू खान के मामले में शुरू से कानूनी लड़ाई लड़ने वाले समाज सेवी और वकील एस हयात ने कोर्ट के फैसले को निराशाजनक बताया है. उन्होंने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे.
    बता दें, एडीजी प्रथम अदालत ने पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में वीडियो फुटेज को सबूत नहीं माना है.
    पहलू खान मामले में आए फैसले पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमारी मांग है कि उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए राजस्थान की कांग्रेस सरकार सभी जरूरी कदम उठाए.
    मुख्य सचिव ने कहा कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस ने वीडियो फुटेज की एफएसएल जांच नहीं कराई. इसके साथ ही मृतक के बच्चे आरोपियों की पहचान नहीं कर सके. इस आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.
    बता दें, आरोपियों के वकील हुकुम सिंह ने निचली अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर सभी को बरी किया है.
    वहीं पहलू खान मामले पर न्यायालय के फैसले पर तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पहलू खान के हत्यारों को सजा दिलाने की कोशिश की. मगर पीड़ित पक्ष की ओर से एफआईआर में निर्दोष लोगों के नाम लिखवा दिए गए. जिसकी वजह से इस तरह का फैसला आया.
    इन सात करणो से कोर्ट ने किया बरी
    1. कोर्ट ने घटनास्थल के वीडियो को ऐडमिसेबल सुबूत नहीं माना है.

    2. कोर्ट ने यह भी कहा है कि पुलिस ने वीडियो की एफएसएल जांच नहीं करवाई है. ऐसे में वीडियो को सुबूत के तौर पर नहीं रखा जा सकता है.

    3. कोर्ट ने यह कहा कि वीडियो बनाने वाले शख्स ने वीडियो बनाने के बारे में सही-सही जानकारी नहीं दी.

    4. कोर्ट ने जजमेंट में कहा कि आरोपियों की शिनाख्त परेड जेल में नहीं कराई गई है ऐसे में गवाहों पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है.

    5. मोबाइल की सीडीआर को भरोसेमंद सुबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है.

    6. कैलाश अस्पताल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिटाई की बात स्पष्ट नहीं थी.

    7. पहलू खान ने जिन 6 लोगों का नाम डाईंग डिक्लेरेशन में बताया था वे लोग आरोपियों में शामिल नहीं थे. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि पहलू खान का बेटा कोर्ट के अंदर भी आरोपियों की पहचान नहीं कर सका.

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